प्रश्न उपनिषद
ग्रंथ
अन्य नाम: प्रश्नोपनिषद्, प्रश्न
रचयिता / कर्ता: अपौरुषेय
प्रश्न उपनिषद अथर्ववेद से संबंधित है। इसका नाम 'प्रश्न' इसलिए है क्योंकि यह छह जिज्ञासुओं के छह प्रश्नों और ऋषि पिप्पलाद के उत्तरों के रूप में संरचित है।
इसमें छह प्रश्न हैं, जिनमें सृष्टि के मूल, प्राण, मन, स्वप्न, ॐ की उपासना और पुरुष की षोडश कलाओं पर चर्चा है।
ऋषि पिप्पलाद इन प्रश्नों का उत्तर देते हुए ब्रह्म, प्राण और आत्मा का स्वरूप समझाते हैं, तथा ॐ को पर और अपर ब्रह्म का सूचक बताते हैं।
यह श्रुति का भाग होने से अपौरुषेय है। यह उपनिषद प्रश्न-उत्तर शैली में गूढ़ ब्रह्मविद्या को सरलता से प्रस्तुत करता है।
प्रसिद्ध कथन
एतद्वै सत्यकाम परं चापरं च ब्रह्म यदोंकारः (प्रश्न उपनिषद 5.2) — भाव: 'हे सत्यकाम, ॐ ही पर और अपर दोनों ब्रह्म हैं।'
संबंधित
स्रोत: प्रश्न उपनिषद (अथर्ववेद)