अथर्ववेद
शब्दावली
अन्य नाम: अथर्वण वेद, अथर्ववेद संहिता
अथर्ववेद अथर्वा और अंगिरा ऋषियों की परम्परा से जुड़ा चौथा वेद है। इसकी विषय-वस्तु अन्य वेदों से भिन्न है — इसमें रोग-निवारण, आयु-रक्षा, शान्ति-कर्म, राज-धर्म, दाम्पत्य और दैनिक जीवन के अनेक विषयों के साथ ब्रह्मविद्या भी मिलती है। यह ब्रह्मा ऋत्विक से सम्बद्ध माना जाता है।
संहिता में बीस काण्ड, लगभग 730 सूक्त और छह हजार मन्त्र हैं। इसकी दो प्रमुख शाखाएँ हैं — शौनक और पैप्पलाद। इसमें चिकित्सा और औषधि-सम्बन्धी मन्त्र होने के कारण इसे आयुर्वेद की परम्परा से भी जोड़ा जाता है।
मुण्डक, माण्डूक्य और प्रश्न उपनिषद इसी वेद से जुड़े हैं। माण्डूक्य में "अयमात्मा ब्रह्म" महावाक्य और ओंकार की चार मात्राओं का सूक्ष्म विवेचन मिलता है।
प्रसिद्ध कथन
अयमात्मा ब्रह्म (माण्डूक्य उपनिषद्, अथर्ववेद) — भावानुवाद: यह आत्मा ही ब्रह्म है।
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स्रोत: अथर्ववेद