ऐतरेय ब्राह्मण
ग्रंथ
अन्य नाम: ऐतरेय, ऐतरेय ब्राह्मणम्
रचयिता / कर्ता: अपौरुषेय
ऐतरेय ब्राह्मण ऋग्वेद से संबंधित प्रमुख ब्राह्मण ग्रंथ है। ब्राह्मण ग्रंथ वे होते हैं जिनमें संहिता के मंत्रों के प्रयोग, यज्ञ-विधि और उनके पीछे की कथाओं (आख्यानों) का विवेचन होता है।
यह ग्रंथ 8 पंचिकाओं और 40 अध्यायों में विभाजित है। परंपरा इसे महर्षि ऐतरेय से जोड़ती है, जो ऋग्वेद की परंपरा के आचार्य माने जाते हैं।
इसमें सोम-यज्ञ, राजसूय, अग्निष्टोम आदि यज्ञों की विधियाँ तथा शुनःशेप, हरिश्चन्द्र, इन्द्र-वृत्र आदि अनेक प्रसिद्ध आख्यान संकलित हैं।
इसी ब्राह्मण से ऐतरेय आरण्यक और ऐतरेय उपनिषद जुड़े हैं। यह वैदिक यज्ञ-परंपरा और प्राचीन आख्यानों को समझने का महत्वपूर्ण स्रोत है।
संबंधित
स्रोत: ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद शाखा)