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अंत्येष्टि संस्कार

संस्कार एवं श्राद्ध-विधि

अन्य नाम: अंत्येष्टि, अन्त्येष्टि, दाह-संस्कार, मृतसंस्कार

संस्कारगरुड़ पुराणमृत्युप्रेत

अंत्येष्टि अंतिम संस्कार है, जो मृत्यु के बाद किया जाता है। इसमें शरीर का दाह-संस्कार और प्रेत-कर्म होते हैं।

यह मृत्यु के बाद शीघ्र, प्रायः उसी दिन या अगले दिन किया जाता है। शव अग्नि को अर्पित किया जाता है; इसके बाद दस से बारह दिन तक पिंडदान, अस्थि-संचयन और सपिंडीकरण आदि कर्म होते हैं।

इसकी विधि गृह्यसूत्रों तथा गरुड़ पुराण और मत्स्य पुराण में वर्णित है। इसका महत्व मृत आत्मा की शांति और उसे पितरों में सम्मिलित करने में है।

प्रसिद्ध कथन

हे अग्निदेव! इस शरीर को शुद्ध करके मृत आत्मा को पितृलोक तक पहुँचाने में सहायक बनो। (भावानुवाद)

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श्राद्धपिंडदानतर्पणगरुड़ पुराणपितृपक्ष

स्रोत: गरुड़ पुराण