शास्त्रज्ञशास्त्रों के ग्रंथ, पात्र, कथाएँ, स्थान और शब्द — एक जगह

पितृपक्ष

संस्कार एवं श्राद्ध-विधि

अन्य नाम: पितृपक्ष, महालय पक्ष, पितरों का पक्ष

श्राद्धपितृगरुड़ पुराणअमावस्या

पितृपक्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष के सोलह दिनों का काल है, जो पितरों के निमित्त समर्पित है। इसे महालय पक्ष भी कहते हैं।

इस पक्ष में, विशेषकर पूर्णिमा से अमावस्या तक, पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। अंतिम दिन महालय अमावस्या को सर्वपितृ श्राद्ध होता है।

इसका आधार गरुड़ पुराण, वायु पुराण और श्राद्ध-तत्त्व जैसे ग्रंथ हैं। इसका महत्व पितृ-ऋण उतारने और पितरों की तृप्ति से जुड़ा है।

प्रसिद्ध कथन

ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः। पितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः। प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः॥

संबंधित

श्राद्धतर्पणपिंडदानपार्वण श्राद्ध

स्रोत: गरुड़ पुराण