विवाह संस्कार
संस्कार एवं श्राद्ध-विधि
अन्य नाम: विवाह, पाणिग्रहण, उद्वाह, परिणय
विवाह संस्कार स्त्री और पुरुष को पति-पत्नी के रूप में जोड़ने वाला गृहस्थ-आश्रम का प्रमुख संस्कार है। इसमें अग्नि और मंत्र साक्षी होते हैं।
विधि में कन्यादान, पाणिग्रहण, अग्नि के समक्ष सात वचन अर्थात् सप्तपदी और सिंदूरदान जैसे अंग होते हैं। यह शुभ मुहूर्त में, वर और वधू दोनों पक्षों की सहमति से संपन्न होता है।
इसकी विधि गृह्यसूत्रों और मनुस्मृति में वर्णित है। इसका महत्व संतानोत्पत्ति, धर्म-पालन और कुल-परंपरा को आगे बढ़ाने में है।
प्रसिद्ध कथन
ॐ गृह्णामि ते सौभगत्वाय हस्तं मया पत्या जरदष्टिर्यथासः। भगो अर्यमा सविता पुरंधिर्मह्यं त्वादुर्गार्हपत्याय देवाः॥
संबंधित
स्रोत: गृह्यसूत्र