शिखंडी
महाभारत
अन्य नाम: शिखण्डी, अंबा, द्रुपदपुत्र, पांचाल्य
शिखंडी पूर्वजन्म में काशिराज की ज्येष्ठ पुत्री अंबा थीं। भीष्म ने उनका तथा उनकी बहनों अंबिका-अंबालिका का हरण किया था; अंबा ने भीष्म को अपने जीवन का शत्रु मानकर प्रतिशोध की प्रतिज्ञा ली। उन्होंने परशुराम से भी भीष्म का वध कराने का प्रयास किया, परंतु सफल न हुईं।
शिव की कृपा से अंबा को वर मिला कि अगले जन्म में वे भीष्म के वध का कारण बनेंगी। वे द्रुपद की पुत्री के रूप में जन्मीं, परंतु यक्ष के वर से पुरुषत्व प्राप्त करके ‘शिखंडी’ बनीं और द्रुपद के पुत्र के रूप में पाली गईं। उनका विवाह हुआ, पर उन्होंने अपने पूर्वजन्म का रहस्य प्रकट किया और पत्नी को लौटा दिया।
कुरुक्षेत्र में अर्जुन ने शिखंडी को अपने रथ के आगे रखा; भीष्म ने अंबा के रूप को पहचानकर उन पर शस्त्र नहीं चलाए और अस्त्र त्याग दिए। इस प्रकार शिखंडी भीष्म के पतन का निमित्त बने। शिखंडी को कुछ ग्रंथों में नपुंसक या अर्ध-पुरुष रूप में वर्णित किया गया है और भीष्म के शरों से उनकी भी मृत्यु हुई।
नाते-रिश्ते
- पिता: द्रुपद
- भाई: धृष्टद्युम्न
- बहन: द्रौपदी
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
पूर्वजन्म में काशिराज की पुत्री अंबा थीं; भीष्म से बदला लेने हेतु शिखंडी रूप में जन्म।
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: महाभारत – आदि पर्व; भीष्म पर्व