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योगतत्त्व उपनिषद

ग्रंथ

अन्य नाम: योगतत्त्वोपनिषद्

रचयिता / कर्ता: अपौरुषेय / परंपरा-प्रसिद्ध

उपनिषदयोगवेदांत

योगतत्त्व उपनिषद योग के सिद्धांत और अभ्यास का विस्तृत वर्णन करता है। इसमें मंत्र, लय, हठ और राजयोग — योग की चार शैलियाँ बताई गई हैं।

यह उपनिषद अथर्ववेद से जुड़ा है, जबकि इसका बड़ा तेलुगु संस्करण कृष्ण यजुर्वेद से। इसमें प्राणायाम, कुंडलिनी और ध्यान की विधियाँ बताई गई हैं।

इसका मुख्य सिद्धांत है कि केवल ज्ञान या केवल योग से मोक्ष नहीं मिलता, दोनों का समन्वय आवश्यक है। प्रसिद्ध भाव है — ज्ञान के बिना योग और योग के बिना ज्ञान मोक्ष नहीं दे सकते। (भावानुवाद)

प्रसिद्ध कथन

ज्ञान के बिना योग और योग के बिना ज्ञान मोक्ष नहीं दे सकते। (भावानुवाद)

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स्रोत: अथर्ववेद