शांडिल्य उपनिषद
ग्रंथ
अन्य नाम: शाण्डिल्य उपनिषद, शांडिल्योपनिषद्
रचयिता / कर्ता: अपौरुषेय / परंपरा-प्रसिद्ध
शांडिल्य उपनिषद योग और ध्यान का प्रतिपादन करने वाला उपनिषद है। इसमें शांडिल्य ऋषि को दिए गए उपदेश के रूप में योग के आठ अंग बताए गए हैं।
यह उपनिषद अथर्ववेद से जुड़ा है और इसे योग उपनिषदों में गिना जाता है। इसमें यम, नियम, आसन और प्राणायाम आदि का वर्णन मिलता है।
इसका मुख्य सिद्धांत है कि अष्टांग योग से मन शुद्ध होता है और सगुण तथा निर्गुण ब्रह्म का साक्षात्कार होता है। इसमें यमों में अहिंसा, सत्य और अस्तेय को प्रमुख बताया गया है। प्रसिद्ध भाव है — योग के आठ अंग मोक्ष के सोपान हैं। (भावानुवाद)
प्रसिद्ध कथन
अहिंसा, सत्य, अस्तेय और ब्रह्मचर्य आदि यम योग के प्रथम अंग हैं। (भावानुवाद)
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स्रोत: अथर्ववेद