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योग वासिष्ठ

ग्रंथ

अन्य नाम: योगवासिष्ठ, वसिष्ठ गीता, योगवासिष्ठ महारामायण

रचयिता / कर्ता: वाल्मीकि (परंपरा-प्रसिद्ध)

दर्शनवेदांतअद्वैतयोग

योग वासिष्ठ वसिष्ठ मुनि और श्रीराम के संवाद रूप में लिखा गया अद्वैत वेदांत तथा योग का विशाल ग्रंथ है। परंपरा में इसके रचयिता वाल्मीकि माने जाते हैं।

ग्रंथ में लगभग 32 हज़ार श्लोक माने जाते हैं और यह छह प्रकरणों में विभाजित है — वैराग्य, मुमुक्षुव्यवहार, उत्पत्ति, स्थिति, उपशम और निर्वाण।

मुख्य विषय आत्म-ज्ञान और मोक्ष है। इसमें बताया गया है कि जगत् माया और मन की कल्पना है तथा आत्मा एक और अद्वैत है। यह श्रीराम को राजा बनने से पहले वैराग्य उत्पन्न होने की कथा से आरंभ होता है।

महात्मा: यह भारतीय अद्वैत वेदांत और योग-दर्शन का महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है और इसे मोक्ष-विद्या का विशाल स्रोत माना जाता है।

प्रसिद्ध कथन

मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः। (भावानुवाद)

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श्रीरामवसिष्ठआत्मामोक्षमाया

स्रोत: योग वासिष्ठ