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यम एवं नियम

आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग

अन्य नाम: यम, नियम, यम-नियम

योगयोग दर्शनअष्टांग योग

यम और नियम अष्टांग योग के प्रथम दो अंग हैं। यम बाह्य आचरण के नियम हैं और नियम आंतरिक अनुशासन के। ये योग-साधना की नींव माने जाते हैं।

पतंजलि के योग सूत्र में यम के पाँच अंग बताए गए हैं — अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य तथा अपरिग्रह। नियम के पाँच अंग हैं — शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय तथा ईश्वर-प्रणिधान।

यम-नियम साधक के चरित्र तथा मन को शुद्ध करते हैं। इनके पालन से ही आगे के अंग — आसन, प्राणायाम आदि — सफल होते हैं।

प्रसिद्ध कथन

अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह — ये पाँच यम हैं। (योग सूत्र, भावानुवाद)
शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर-प्रणिधान — ये पाँच नियम हैं। (योग सूत्र, भावानुवाद)

संबंधित

योग दर्शनआसनप्राणायामधारणा

स्रोत: योग सूत्र