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धारणा

आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग

अन्य नाम: धारणा

योगधारणाअष्टांग योग

धारणा अष्टांग योग का छठा अंग है। इसमें चित्त को किसी एक देश या वस्तु पर स्थिर किया जाता है।

योग सूत्र में कहा गया है — 'देशबन्धश्चित्तस्य धारणा', अर्थात् चित्त को एक स्थान पर बाँधना धारणा है। यह अंतरंग साधना का प्रथम चरण है।

धारणा से चित्त एकाग्र होता है। इसके अभ्यास से ध्यान की निरंतरता प्राप्त होती है।

प्रसिद्ध कथन

देशबन्धश्चित्तस्य धारणा। (योग सूत्र 3.1)

संबंधित

प्रत्याहारध्यानसमाधिप्राणायामयोग दर्शन

स्रोत: योग सूत्र