आसन
आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग
अन्य नाम: आसन, योगासन
आसन अष्टांग योग का तीसरा अंग है। इसका अर्थ है शरीर को स्थिर तथा सुखद स्थिति में बैठाना।
पतंजलि के योग सूत्र में कहा गया है — 'स्थिरसुखमासनम्', अर्थात् जो स्थिति स्थिर और सुखद हो, वही आसन है। हठयोगप्रदीपिका में अनेक आसनों का वर्णन मिलता है।
आसन से शरीर स्वस्थ, लचीला तथा साधना योग्य बनता है। यह प्राणायाम तथा ध्यान की स्थिरता का आधार है।
प्रसिद्ध कथन
स्थिरसुखमासनम्। (योग सूत्र 2.46)
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स्रोत: योग सूत्र