विष्णु पुराण
ग्रंथ
अन्य नाम: विष्णुपुराण, पुराणरत्न
रचयिता / कर्ता: वेदव्यास
विष्णु पुराण अट्ठारह महापुराणों में अत्यंत प्राचीन और प्रतिष्ठित माना जाता है, जिसे 'पुराणरत्न' कहा गया है। इसके रचयिता वेदव्यास हैं। ग्रंथ छह अंशों में विभाजित है और इसमें लगभग तेईस हज़ार श्लोक माने जाते हैं।
मुख्य विषय — सृष्टि की उत्पत्ति, प्रलय, मन्वंतर, वंश-वर्णन तथा भविष्य-कथन। ग्रंथ का पाँचवाँ अंश श्रीकृष्ण के जीवन से संबंधित है, जिसमें उनका जन्म, बाल-लीलाएँ, मथुरा-द्वारका तथा महाभारत-काल की कथाएँ हैं।
इसमें भक्ति, वर्णाश्रम-धर्म, यज्ञ तथा विष्णु की विभूतियों का वर्णन है। कथा परीक्षित और मैत्रेय के संवाद के रूप में चलती है।
महात्मा: यह पुराण वैष्णव धर्म और श्रीकृष्ण-चरित का प्राचीनतम प्रमाणिक स्रोत माना जाता है।
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स्रोत: विष्णु पुराण