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विराट

महाभारत

अन्य नाम: मत्स्यराज, विराट, मत्स्यनरेश

मत्स्यअज्ञातवासउत्तराउत्तरकुरुक्षेत्र

विराट मत्स्य देश के राजा थे और उनकी राजधानी विराटनगर थी। तेरहवें वर्ष के अज्ञातवास में पांडवों ने उनके राज्य में भिन्न-भिन्न वेश धारण करके शरण ली — युधिष्ठिर ‘कंक’ द्यूत-क्रीड़क, भीम ‘वल्लभ’ रसोइया, अर्जुन ‘बृहन्नला’ नृत्य-गुरु, नकुल अश्वपाल और सहदेव गो-रक्षक बने, तथा द्रौपदी रानी सुदेष्णा की सेविका ‘सैरंध्री’ बनीं।

इस काल में विराट के सेनापति कीचक ने द्रौपदी पर अत्याचार करना चाहा, जिसे भीम ने मार डाला। दुर्योधन ने अज्ञातवास का भेद जानने के लिए विराट की गौओं का हरण किया, परंतु अर्जुन (बृहन्नला) ने अकेले कौरव-सेना को परास्त करके गौएँ छुड़ाईं।

अज्ञातवास पूरा होने पर विराट ने अपनी पुत्री उत्तरा का विवाह अभिमन्यु से कर दिया। कुरुक्षेत्र युद्ध में विराट और उनके पुत्र उत्तर पांडवों के पक्ष में लड़े; उत्तर युवावस्था में ही वीरगति को प्राप्त हुए। विराट पांडवों के अज्ञातवास-काल के आश्रयदाता के रूप में महाभारत में महत्वपूर्ण हैं।

नाते-रिश्ते

  • राज्य: मत्स्य
  • पुत्र: उत्तर, श्वेत, संख
  • पुत्री: उत्तरा
  • सम्बन्ध: पांडवों के आश्रयदाता

पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध

पूर्वजन्म में मरुत्गणों का अंश थे; विराट रूप में जन्मे।

प्रसिद्ध कथन

अज्ञातवास की शर्त (भावानुवाद) — “मेरे राज्य में रहते हुए तुम्हें अपनी पहचान छिपानी होगी और राजकीय सेवा करनी होगी।”
अभिमन्यु से विवाह-प्रस्ताव (भावानुवाद) — “यह मेरी पुत्री उत्तरा है; इसे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करो।”

संबंधित

अर्जुनअभिमन्युद्रौपदीयुधिष्ठिरदुर्योधनकुरुक्षेत्र

स्रोत: महाभारत – विराट पर्व