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जरासंध

महाभारत

अन्य नाम: मगधराज, बृहद्रथपुत्र, जरासंध

मगधकंसकृष्णचक्रवर्तीराजसूय

जरासंध मगध के राजा बृहद्रथ के पुत्र थे। परंपरा के अनुसार उनका जन्म दो टुकड़ों में हुआ था, जिन्हें राक्षसी जरा ने जोड़कर जीवित किया, इसीलिए वे ‘जरासंध’ कहलाए। वे अत्यंत बलशाली और महत्वाकांक्षी थे तथा अनेक राजाओं को बंदी बनाकर उन्होंने चक्रवर्ती बनने का प्रयास किया।

उनकी पुत्रियों का विवाह कंस से हुआ था, इसीलिए कृष्ण के कंस-वध के बाद उनका कृष्ण और यदुवंश से गहरा बैर हो गया। उन्होंने कई बार मथुरा पर आक्रमण किया, जिसके कारण यदुवंश को द्वारका जाना पड़ा। युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में जरासंध को हराना आवश्यक था, क्योंकि वे अनेक राजाओं को बंदी बनाए हुए थे।

कृष्ण की योजना से भीम और जरासंध के बीच द्वंद्व-युद्ध हुआ, जो कई दिनों तक चला। अंत में कृष्ण के संकेत से भीम ने जरासंध के शरीर को दो टुकड़ों में चीरकर फेंक दिया, जिससे उनका वध हुआ। इस प्रकार राजसूय यज्ञ संपन्न हुआ और बंदी राजा मुक्त हुए।

नाते-रिश्ते

  • पिता: बृहद्रथ (मगधराज)
  • पुत्र: सहदेव
  • पुत्रियाँ: अस्ति, प्राप्ति
  • दामाद: कंस

पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध

पूर्वजन्म में विप्रचित्ति नामक दानव थे; जरासंध रूप में जन्मे।

प्रसिद्ध कथन

कृष्ण को चुनौती (भावानुवाद) — “मैं समस्त राजाओं को बंदी बनाकर चक्रवर्ती सम्राट बनूँगा।”
कृष्ण का संकेत भीम को (भावानुवाद) — “इसे मत फेंको, बल्कि बीच से चीरकर दो टुकड़े कर दो, तभी इसका अंत होगा।”

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स्रोत: महाभारत – सभा पर्व