विद्यारंभ संस्कार
संस्कार एवं श्राद्ध-विधि
अन्य नाम: विद्यारंभ, अक्षरारंभ, अक्षराभ्यास
विद्यारंभ या अक्षरारंभ संस्कार में बालक की विद्या-यात्रा प्रारंभ होती है। इसमें बालक को पहला अक्षर लिखवाया और पढ़ाया जाता है।
यह प्रायः पाँचवें वर्ष में, विद्या की देवी सरस्वती तथा गणपति के पूजन के साथ किया जाता है। बालक से पट्टिका या स्लेट पर ओम् अथवा शुभ अक्षर लिखवाया जाता है और गुरु या पिता प्रथम पाठ कराते हैं।
इसकी परंपरा स्मृतियों और संस्कार-ग्रंथों में मिलती है। इसका महत्व बालक के ज्ञान-जीवन की शुभ शुरुआत और शिक्षा के प्रति श्रद्धा जगाने में है।
प्रसिद्ध कथन
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥ (सरस्वती वंदना)
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स्रोत: गृह्यसूत्र