कर्णवेध संस्कार
संस्कार एवं श्राद्ध-विधि
अन्य नाम: कर्णवेध, कर्णवेधन
कर्णवेध संस्कार में शिशु के कान छेदे जाते हैं। यह स्वास्थ्य और शुभता से जुड़ा संस्कार है।
यह प्रायः छठे या सातवें मास में, अथवा तीसरे या पाँचवें वर्ष में किया जाता है। विधि में पूजन और मंगलाचार के बाद शुभ मुहूर्त में कान छेदे जाते हैं; यह बालक और बालिका दोनों के लिए किया जाता है।
इसका उल्लेख गृह्यसूत्रों और स्मृतियों में मिलता है। शास्त्रों में इसे आरोग्य, श्रवण-शक्ति तथा आभूषण-धारण से जोड़ा जाता है।
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स्रोत: गृह्यसूत्र