वेदारंभ संस्कार
संस्कार एवं श्राद्ध-विधि
अन्य नाम: वेदारंभ, उपाकर्म, वेदारंभण
वेदारंभ संस्कार में बालक उपनयन के बाद गुरु के पास रहकर वेदाध्ययन प्रारंभ करता है। इसे उपाकर्म भी कहा जाता है।
यह उपनयन के तुरंत बाद, श्रावण या शुभ मुहूर्त में किया जाता है। गुरु बालक को वेद-मंत्रों का प्रथम पाठ कराते हैं और ब्रह्मचर्य तथा अध्ययन के नियम बताते हैं।
इसका आधार गृह्यसूत्र और श्रौत-परंपरा है। इसका महत्व ज्ञान-परंपरा को आगे बढ़ाने और वेदों के संरक्षण से जुड़ा है।
प्रसिद्ध कथन
ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥ (तैत्तिरीय उपनिषद्)
संबंधित
स्रोत: गृह्यसूत्र