गृह्यसूत्र
ग्रंथ
अन्य नाम: गृह्य कल्पसूत्र
रचयिता / कर्ता: परंपरा-प्रसिद्ध
गृह्यसूत्र कल्प-साहित्य का वह भाग है जिसमें गृहस्थ के नित्य और विशेष कर्मों तथा संस्कारों की विधि बताई गई है। इन्हें गृह्य इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये घर-गृहस्थी से जुड़े धार्मिक कर्मों का वर्णन करते हैं।
प्रमुख गृह्यसूत्र आश्वलायन, पारस्कर, गोभिल, खादिर और हिरण्यकेशी आदि ऋषियों से जुड़े हैं। ये सूत्र-रूप में होते हैं और प्रत्येक वेद-शाखा की अपनी परंपरा के अनुसार चलते हैं, इसलिए इन्हें परंपरा-प्रसिद्ध कहा जाता है।
विषय में जन्म, नामकरण, अन्नप्राशन, उपनयन, विवाह और अंत्येष्टि जैसे संस्कार तथा नित्य पूजा-हवन शामिल हैं। गृह्यसूत्र भारतीय गृहस्थ-जीवन और संस्कार-परंपरा की रीढ़ हैं और हिंदू सामाजिक रीति-रिवाजों का मूल आधार माने जाते हैं।
संबंधित
स्रोत: गृह्यसूत्र (आश्वलायन, पारस्कर, गोभिल आदि)