केशान्त संस्कार
संस्कार एवं श्राद्ध-विधि
अन्य नाम: केशान्त, गोदान, केशान्त संस्कार
केशान्त संस्कार में युवक की दाढ़ी और मूँछ पहली बार काटी जाती है। इसे गोदान संस्कार भी कहा जाता है।
यह प्रायः सोलहवें वर्ष में, वेदाध्ययन पूर्ण होने पर किया जाता है। इसके साथ स्नान, पूजन और गोदान अर्थात् गौ के दान का विधान है।
इसका उल्लेख गृह्यसूत्रों और स्मृतियों में मिलता है। इसका महत्व ब्रह्मचर्य-काल की परिपूर्णता और बालक के युवावस्था में प्रवेश से जुड़ा है।
प्रसिद्ध कथन
हे ईश्वर! प्रथम केश-त्याग से ब्रह्मचर्य की परिपूर्णता हो और आयु तथा ब्रह्मतेज की वृद्धि हो। (भावानुवाद)
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स्रोत: गृह्यसूत्र