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समावर्तन संस्कार

संस्कार एवं श्राद्ध-विधि

अन्य नाम: समावर्तन, समावर्तनम्, स्नान

संस्कारगृह्यसूत्रगुरुकुलगृहस्थ

समावर्तन का अर्थ है लौटना। इस संस्कार में विद्यार्थी गुरुकुल से विद्या पूर्ण करके अपने घर लौटता है और ब्रह्मचर्य-आश्रम की समाप्ति होती है।

यह वेदाध्ययन पूर्ण होने पर किया जाता है। इसमें समावर्तन-स्नान, यज्ञोपवीत परिवर्तन, नए वस्त्र धारण तथा गुरु को दक्षिणा और आशीर्वाद का विधान है।

इसकी विधि गृह्यसूत्रों में वर्णित है। इसका महत्व विद्यार्थी के गृहस्थ-आश्रम में प्रवेश और स्वतंत्र जीवन की शुरुआत से जुड़ा है।

प्रसिद्ध कथन

हे गुरु! विद्यादान से मैं ऋणमुक्त हुआ; अब गृहस्थ-धर्म का पालन करते हुए धर्म के मार्ग पर चलूँ। (भावानुवाद)

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स्रोत: गृह्यसूत्र