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कल्प (वेदांग)

ग्रंथ

अन्य नाम: कल्प वेदांग, कल्पसूत्र

रचयिता / कर्ता: आश्वलायन, बौधायन, आपस्तम्ब आदि सूत्रकार

वेदांगयज्ञसंस्कारधर्मसूत्र

कल्प छह वेदांगों में से एक है, जिसमें यज्ञ-अनुष्ठान, गृह्य-संस्कार, धर्म और वेदि-निर्माण (शुल्व) की विधियाँ सूत्र-रूप में संकलित हैं।

कल्प के चार प्रमुख भाग माने जाते हैं — श्रौत सूत्र (सोम आदि यज्ञ), गृह्य सूत्र (विवाह, जन्म आदि संस्कार), धर्म सूत्र (सामाजिक-धार्मिक नियम) और शुल्व सूत्र (यज्ञ-वेदी की माप-ज्यामिति)।

आश्वलायन, बौधायन और आपस्तम्ब इसके प्रसिद्ध सूत्रकार हैं। कल्प-सूत्रों से ही स्मृति-साहित्य और हिन्दू संस्कार-परंपरा का आधार बना।

यह वेदांग-साहित्य का भाग है और वेद-पुरुष का हाथ माना जाता है। यह यज्ञ तथा गृहस्थ-जीवन की व्यावहारिक विधियों का प्रमुख स्रोत है।

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स्रोत: श्रौत, गृह्य, धर्म एवं शुल्व सूत्र