शास्त्रज्ञशास्त्रों के ग्रंथ, पात्र, कथाएँ, स्थान और शब्द — एक जगह

व्याकरण (वेदांग)

ग्रंथ

अन्य नाम: व्याकरण वेदांग, व्याकरण

रचयिता / कर्ता: पाणिनि (अष्टाध्यायी)

वेदांगभाषासंस्कृतशब्दशास्त्र

व्याकरण छह वेदांगों में से एक है, जिसका कार्य वेद-मंत्रों और भाषा के शब्दों के शुद्ध रूप तथा प्रयोग को सुनिश्चित करना है।

वैदिक परंपरा में पाणिनि की 'अष्टाध्यायी' व्याकरण का सर्वोच्च ग्रंथ मानी जाती है, जिसमें संस्कृत भाषा के नियम लगभग चार हजार सूत्रों में संकलित हैं।

पाणिनि से पूर्व ऐन्द्र, काशकृत्स्न आदि व्याकरण रहे, और पाणिनि के बाद कात्यायन की वार्तिक तथा पतंजलि का महाभाष्य हुए।

यह वेदांग-साहित्य का भाग होने से वेद-पुरुष का मुख माना जाता है। इससे संस्कृत भाषा और भारतीय भाषा-विज्ञान की अटल नींव पड़ी।

प्रसिद्ध कथन

अथ शब्दानुशासनम्। (पाणिनि अष्टाध्यायी का प्रारंभ)

संबंधित

वेदांगचार वेदनिरुक्त (वेदांग)

स्रोत: पाणिनि अष्टाध्यायी