गंगा
महाभारत
अन्य नाम: भागीरथी, देवनदी, जाह्नवी, सुरसरिता
गंगा देवलोक की पवित्र नदी और शिव की जटाओं में निवास करने वाली देवी हैं। परंपरा के अनुसार अष्टवसुओं ने वशिष्ठ ऋषि की गाय का हरण किया था, जिसके शाप से उन्हें मृत्युलोक में जन्म लेना पड़ा। गंगा ने वसुओं को शाप से मुक्त कराने का वचन लिया और इसी कारण पृथ्वी पर अवतरित हुईं।
राजा शांतनु से उनका विवाह हुआ, परंतु शर्त के अनुसार उन्होंने सात पुत्रों को जन्म लेते ही जल में प्रवाहित कर दिया, क्योंकि वे वसु थे। आठवें पुत्र को शांतनु ने रोका; गंगा उसे ‘देवव्रत’ नाम देकर ले गईं और बड़ा होने पर शिक्षा-दीक्षा के बाद पिता को सौंप दिया — यही बालक भीष्म बना।
गंगा कुरुवंश की आदि-माता हैं और पवित्रता, त्याग तथा मोक्षदायिनी शक्ति की प्रतीक हैं। भीष्म की मृत्यु के समय भी गंगा का स्मरण किया गया और उन्होंने अपने पुत्र के लिए मातृ-भाव प्रकट किया। हिंदू परंपरा में गंगा-स्नान और गंगा-जल का विशेष महत्व है।
नाते-रिश्ते
- पति: शांतनु
- पुत्र: भीष्म (देवव्रत)
- स्वरूप: देवी एवं पवित्र नदी
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
स्वयं देवी गंगा; वसुओं के शाप-मोचन हेतु माता रूप में पृथ्वी पर अवतरित हुईं।
प्रसिद्ध कथन
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स्रोत: महाभारत – आदि पर्व