स्वर्गारोहण पर्व
ग्रंथ
अन्य नाम: स्वर्गारोहणपर्व, स्वर्गारोहण पर्व, अष्टादश पर्व
रचयिता / कर्ता: वेदव्यास / वैशंपायन-सूत
स्वर्गारोहण पर्व महाभारत का अंतिम (अठारहवाँ) पर्व है। इसमें युधिष्ठिर स्वर्ग पहुँचते हैं।
स्वर्ग में युधिष्ठिर को दुर्योधन आदि कौरव दिखाई देते हैं, पर अपने भाई-पत्नी नरक में दिखते हैं। यह उनके लिए असह्य होता है और वे भी नरक में रहना चाहते हैं।
तब देवतागण बताते हैं कि यह युधिष्ठिर की माया (परीक्षा) थी, और वास्तव में पांडव स्वर्ग में ही हैं।
अंत में युधिष्ठिर का अपने भाइयों और द्रौपदी से मिलन होता है और वे गंगा के दिव्य स्वरूप में परस्पर मिलते हैं। यह पर्व महाभारत की कथा का मंगलमय समापन है।
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स्रोत: महाभारत, स्वर्गारोहण पर्व