शास्त्रज्ञशास्त्रों के ग्रंथ, पात्र, कथाएँ, स्थान और शब्द — एक जगह

द्रुपद

महाभारत

अन्य नाम: यज्ञसेन, पांचालराज, द्रुपद

पांचालद्रौपदीधृष्टद्युम्नद्रोणयज्ञ

द्रुपद पांचाल देश के राजा थे और बचपन में द्रोणाचार्य के सहपाठी रहे। राजा बनने के बाद उन्होंने दरिद्र द्रोण का तिरस्कार किया, जिससे द्रोण ने अपने शिष्यों से उन्हें बंदी बनाकर लाने की गुरु-दक्षिणा माँगी। पांडवों ने द्रुपद को पराजित किया, परंतु कृष्ण के संकेत से उन्हें आधा राज्य लौटा दिया गया।

द्रोण से बदला लेने के लिए द्रुपद ने यज्ञ कराया, जिससे अग्नि से धृष्टद्युम्न और द्रौपदी उत्पन्न हुए। धृष्टद्युम्न द्रोण के वध के लिए और द्रौपदी पांडवों की पत्नी बनने के लिए जन्मी थीं। द्रुपद ने द्रौपदी-स्वयंवर का आयोजन किया, जिसमें अर्जुन ने विजय पाई।

कुरुक्षेत्र युद्ध में द्रुपद और उनके पुत्र धृष्टद्युम्न पांडवों के पक्ष में लड़े। युद्ध में उनके कई पुत्र मारे गए और स्वयं द्रुपद भी वीरगति को प्राप्त हुए। वे पांचाल और पांडवों के गठबंधन का आधार-स्तंभ थे।

नाते-रिश्ते

  • पुत्र: धृष्टद्युम्न, शिखंडी
  • पुत्री: द्रौपदी
  • मित्र-शत्रु: द्रोणाचार्य

पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध

पूर्वजन्म में मरुत्गणों का अंश थे; द्रुपद रूप में जन्मे।

प्रसिद्ध कथन

द्रोण को अपमान (भावानुवाद) — “अरे, तुम तो मेरे सहपाठी केवल नाम के थे; अब मेरे दरबार में तुम्हारा कोई स्थान नहीं।”
यज्ञ कराते समय (भावानुवाद) — “मुझे ऐसा पुत्र चाहिए जो द्रोण का वध करे और ऐसी पुत्री जो पांडवों की पत्नी बने।”

संबंधित

द्रौपदीधृष्टद्युम्नद्रोणाचार्यअर्जुनकुरुक्षेत्रपांडु

स्रोत: महाभारत – आदि पर्व; द्रोण पर्व