शतावरी
आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग
अन्य नाम: बहुसुता, नारायणी
शतावरी स्त्री-स्वास्थ्य, बल और स्तन्य-वृद्धि के लिए प्रसिद्ध रसायन औषधि है। इसे बहुसुता और नारायणी भी कहते हैं। इसका वानस्पतिक नाम एस्पैरागस रेसिमोसस है।
चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में शतावरी को बल्य, स्तन्यजनक, वात-पित्त शामक और रसायन बताया गया है। यह मधुर-तिक्त रस और शीतल वीर्य वाली है।
शतावरी शरीर को बल, धातुओं को पोषण तथा स्त्रियों में स्तन्य और गर्भ-स्वास्थ्य को लाभ देती है। इसका प्रयोग चूर्ण, क्वाथ, घृत, अवलेह और तैल में होता है।
प्रसिद्ध कथन
(भावानुवाद) शतावरी शरीर को बल और धातुओं को पोषण देकर स्तन्य तथा ओज बढ़ाती है।
संबंधित
स्रोत: चरक संहिता, सुश्रुत संहिता