रसायन
आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग
अन्य नाम: रसायन तंत्र, कायाकल्प
रसायन आयुर्वेद की वह शाखा है जो आयु, बल, ओज, स्मृति और वर्ण की वृद्धि करती है। यह रोग-निवारण के साथ शरीर के पुनर्निर्माण अर्थात कायाकल्प पर केंद्रित है।
चरक संहिता का रसायनाध्याय (चिकित्सास्थान) इसका प्रमुख स्रोत है, जहाँ रसायन के अनेक द्रव्य और विधियाँ बताई गई हैं। सुश्रुत संहिता में भी रसायन-तंत्र का वर्णन मिलता है।
रसायन का प्रयोग स्वस्थ व्यक्ति में बल-वृद्धि और रोगी में धातु-पोषण के लिए होता है। आमलकी, गुडूची, अश्वगंधा और शतावरी आदि प्रमुख रसायन द्रव्य हैं। इसके लिए सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य और शुद्ध मन आवश्यक हैं।
प्रसिद्ध कथन
(भावानुवाद) जो द्रव्य आयु और बल को बढ़ाए तथा रोगों को दूर करे, वह रसायन है।
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स्रोत: चरक संहिता