ब्राह्मी
आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग
अन्य नाम: सरस्वती, मण्डूकपर्णी
ब्राह्मी मस्तिष्क, स्मृति और बुद्धि को बल देने वाली औषधि है। इसे सरस्वती और मण्डूकपर्णी भी कहा जाता है। इसका वानस्पतिक नाम बकोपा मोन्निएरी है।
चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में ब्राह्मी को मेधाजनक, आयुष्य और पित्त-कफ शामक बताया गया है। यह शीतल वीर्य वाली तथा तिक्त-कषाय रस युक्त है।
ब्राह्मी स्मृति, एकाग्रता और स्वर सुधारती तथा अनिद्रा, चिंता और मानसिक थकान में लाभ देती है। इसका प्रयोग स्वरस, चूर्ण, घृत और तैल रूप में होता है।
प्रसिद्ध कथन
(भावानुवाद) ब्राह्मी मेधा, स्मृति और वाणी को बल देती है तथा मन को शांत करती है।
संबंधित
स्रोत: चरक संहिता, सुश्रुत संहिता