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शतपथ ब्राह्मण

ग्रंथ

अन्य नाम: शतपथ, शतपथ ब्राह्मणम्

रचयिता / कर्ता: अपौरुषेय

ब्राह्मणयज्ञब्रह्मविद्याशुक्ल यजुर्वेद

शतपथ ब्राह्मण शुक्ल यजुर्वेद (वाजसनेयी) से संबंधित ब्राह्मण ग्रंथ है। इसका नाम 'शतपथ' इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें लगभग सौ (शत) अध्याय हैं।

यह वैदिक साहित्य का सबसे विशाल ब्राह्मण ग्रंथ माना जाता है और इसमें यज्ञ-विधियों के साथ अनेक आख्यान, दर्शन और ब्रह्मविद्या के गूढ़ विवेचन मिलते हैं।

परंपरा इसका संबंध महर्षि याज्ञवल्क्य और शाण्डिल्य जैसे आचार्यों से जोड़ती है। इसमें वैदिक यज्ञों की विस्तृत व्याख्या और प्रतीकवाद है।

बृहदारण्यक उपनिषद इसके अंतिम भाग (आरण्यक) से जुड़ा है, जिसमें 'अहं ब्रह्मास्मि' जैसे महावाक्य हैं। इस ग्रंथ का वैदिक धर्म और भारतीय चिंतन में बहुत ऊँचा स्थान है।

संबंधित

यजुर्वेदब्राह्मण ग्रंथबृहदारण्यक उपनिषदयज्ञकल्प (वेदांग)

स्रोत: शतपथ ब्राह्मण (शुक्ल यजुर्वेद शाखा)