वाचस्पति भामती
ग्रंथ
अन्य नाम: भामती, ब्रह्मसूत्र भामती
रचयिता / कर्ता: वाचस्पति मिश्र
यह वाचस्पति मिश्र द्वारा रचित टीका है, जो आदि शंकराचार्य के ब्रह्मसूत्र भाष्य पर भामती नाम से लिखी गई है।
वाचस्पति मिश्र अद्वैत वेदांत के प्रमुख आचार्य थे। उन्होंने शंकर के भाष्य की व्याख्या करते हुए अविद्या के स्वरूप पर विशेष विचार प्रस्तुत किया।
भामती में जीव के बंधन का कारण अविद्या और उपाधि को माना गया है तथा जीव-ब्रह्म की एकता पर बल दिया गया है। इसी टीका से अद्वैत वेदांत में भामती नामक प्रवाह चला, जो विवरण प्रवाह से भिन्न माना जाता है।
प्रसिद्ध कथन
(भावानुवाद) अविद्या जीव की उपाधि है; जीव और ब्रह्म एक ही हैं, भेद केवल उपाधि-जन्य प्रतीत होता है।
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स्रोत: भामती