शाकल शाखा
ग्रंथ
अन्य नाम: शाकला शाखा
रचयिता / कर्ता: शाकल्य (वेदमित्र शाकल्य) / परंपरा-प्रसिद्ध
शाकल शाखा ऋग्वेद की शाखा है। शौनक के चरण-व्यूह के अनुसार ऋग्वेद की पाँच शाखाएँ मानी जाती हैं, जिनमें शाकल प्रमुख है।
आज ऋग्वेद की जो संहिता उपलब्ध है वह शाकल शाखा की ही है; इसके प्रवर्तक शाकल्य माने जाते हैं। यह एकमात्र शाखा है जो पूर्ण रूप से प्रचलित है।
इस शाखा से ऐतरेय ब्राह्मण तथा ऐतरेय आरण्यक जुड़े हैं; यह महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, ओडिशा और तमिलनाडु में प्रचलित है।
प्रसिद्ध कथन
अग्निमीळे पुरोहितं यज्ञस्य देवमृत्विजम्। होतारं रत्नधातमम्॥ (ऋग्वेद संहिता १.१.१)
संबंधित
स्रोत: Wikipedia (Shakha); vedicheritage.gov.in (Rigveda)