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मतंग

रामायण एवं रामचरितमानस

अन्य नाम: मतंग ऋषि, मतंग मुनि

ऋषिशबरी के गुरुपंपा

मतंग (मतंग ऋषि) एक महान तपस्वी ऋषि थे, जिनका आश्रम पंपा सरोवर के निकट था। वे शबरी के गुरु थे।

मतंग ऋषि ने आजीवन तपस्या की और अपने शिष्यों सहित वे मृत्यु के बाद दिव्य लोकों को प्राप्त हुए। उनके आश्रम में उनकी सेविका शबरी रहती थीं।

अरण्यकांड में मतंग ऋषि की भविष्यवाणी थी कि राम उनके आश्रम में अतिथि बनकर आएँगे, और राम के दर्शन से शबरी को मुक्ति मिलेगी। राम ने शबरी का आतिथ्य स्वीकार किया और उसे नवधा भक्ति का उपदेश दिया। इस प्रकार मतंग ऋषि की परंपरा शबरी-प्रसंग से जुड़ी है।

नाते-रिश्ते

  • शिष्या/सेविका: शबरी
  • आश्रम: पंपा सरोवर के निकट

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शबरीशरभंगकबंधसुग्रीव

स्रोत: वाल्मीकि रामायण – अरण्यकाण्ड