रामचरितमानस (बालकाण्ड)
रोज़ का श्लोक
अन्य नाम: मंगल भवन अमंगल हारी
अर्थ — हे दशरथ के आँगन में विहार करने वाले श्रीराम ! आप मंगल के भवन और अमंगल के हारी हैं, मुझ पर कृपा करें।
यह रामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई है। इसमें तुलसीदास जी श्रीराम को मंगल का घर और अमंगल का नाश करने वाला बताकर उनकी कृपा की प्रार्थना करते हैं।
श्लोक
मंगल भवन अमंगल हारी।
द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी॥
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स्रोत: रामचरितमानस