प्रत्याहार
आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग
अन्य नाम: प्रत्याहार
प्रत्याहार अष्टांग योग का पाँचवाँ अंग है। इसमें इंद्रियाँ अपने-अपने विषयों से हट जाती हैं और चित्त अपने स्वरूप में स्थिर होता है।
योग सूत्र में कहा गया है कि विषयों के संपर्क से इंद्रियों का हट जाना प्रत्याहार है। यह बहिरंग से अंतरंग साधना की ओर संक्रमण-बिंदु है।
प्रत्याहार से मन बाहरी विक्षेपों से मुक्त होता है। यह धारणा तथा ध्यान के लिए मन को तैयार करता है।
प्रसिद्ध कथन
स्वविषयासंप्रयोगे चित्तस्य स्वरूपानुकार इवेन्द्रियाणां प्रत्याहारः। (योग सूत्र 2.54)
संबंधित
स्रोत: योग सूत्र