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पार्वण श्राद्ध

संस्कार एवं श्राद्ध-विधि

अन्य नाम: पार्वण श्राद्ध, पर्व श्राद्ध, सामूहिक श्राद्ध

श्राद्धपितृगरुड़ पुराणपितृपक्ष

पार्वण श्राद्ध वह सामूहिक श्राद्ध है जिसे पर्व-तिथियों, विशेषकर पितृपक्ष और अमावस्या पर किया जाता है। इसमें तीन पीढ़ियों का सतीक आवाहन होता है।

विधि में पिता, पितामह, प्रपितामह तथा मातृ-पक्ष की तीन पीढ़ियों का आवाहन, विश्वेदेवों की स्थापना, अर्घ्य, अग्नौकरण, ब्राह्मण भोजन और तीन पिंडों का दान होता है।

इसका आधार गरुड़ पुराण, धर्मसिंधु और श्राद्ध-तत्त्व जैसे ग्रंथ हैं। इसे अन्य श्राद्धों का आदर्श स्वरूप माना जाता है और इसका महत्व पितरों की सामूहिक तृप्ति में है।

प्रसिद्ध कथन

ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः। पितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः। प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः॥

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स्रोत: गरुड़ पुराण