एकोद्दिष्ट श्राद्ध
संस्कार एवं श्राद्ध-विधि
अन्य नाम: एकोद्दिष्ट श्राद्ध, क्षयाह श्राद्ध, वार्षिक श्राद्ध
एकोद्दिष्ट श्राद्ध किसी एक विशेष पितर के उद्देश्य से किया जाता है। इसे क्षयाह या वार्षिक श्राद्ध भी कहते हैं।
यह मृत्यु के समय प्रवृत्त हुई तिथि पर प्रतिवर्ष किया जाता है। इसमें केवल उसी एक पितर का आवाहन और एक ही पिंड का दान होता है; तीन पीढ़ियों का आवाहन तथा विश्वेदेवों की स्थापना नहीं होती।
इसका आधार मत्स्य पुराण, अग्नि पुराण, धर्मसिंधु और श्राद्ध-तत्त्व हैं। इसका महत्व एक विशेष पितर की नियमित तृप्ति और स्मरण में है।
प्रसिद्ध कथन
एकं पवित्रमेकोऽर्घ एकः पिण्डो विधीयते। (मत्स्य पुराण)
संबंधित
स्रोत: गरुड़ पुराण