बर्बरीक
महाभारत
अन्य नाम: खाटूश्यामजी, खाटूश्याम
बर्बरीक घटोत्कच और मौरवी (मोरवी) के पुत्र तथा भीम के पौत्र थे। ये कथा महाभारत के मुख्य पाठ में नहीं, बल्कि लोक-परंपरा तथा स्कंद पुराण आदि में मिलती है। कहा जाता है कि बर्बरीक ने शिव की तपस्या करके तीन बाण प्राप्त किए, जिनसे वे अकेले ही युद्ध का निर्णय कर सकते थे।
जब वे कुरुक्षेत्र की ओर चले, तो श्रीकृष्ण ने उनकी शक्ति और स्वभाव परखने के लिए युद्ध में किस पक्ष का समर्थन करेंगे, यह पूछा। बर्बरीक ने कहा कि वे हारने वाले पक्ष का साथ देंगे, जिससे न्याय बना रहे। इससे श्रीकृष्ण ने समझ लिया कि वे युद्ध का संतुलन बिगाड़ देंगे।
श्रीकृष्ण की प्रेरणा से बर्बरीक ने अपना सिर दान कर दिया और यह वर माँगा कि युद्ध उनके सिर से देखना चाहते हैं। परंपरा में उन्हें खाटूश्यामजी के रूप में पूजा जाता है।
नाते-रिश्ते
- पिता: घटोत्कच
- माता: मौरवी
- पितामह: भीम
- पितामही: हिडिंबा
संबंधित
स्रोत: महाभारत की लोक-परंपरा (स्कंद पुराण एवं राजस्थान की लोककथा)