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नृसिंहतापनी उपनिषद

ग्रंथ

अन्य नाम: नृसिंहतापनीय उपनिषद, नृसिंह तापनी उपनिषद

रचयिता / कर्ता: अपौरुषेय / परंपरा-प्रसिद्ध

उपनिषदवैष्णवअथर्ववेद

नृसिंहतापनी उपनिषद भगवान नृसिंह को परब्रह्म मानने वाला वैष्णव उपनिषद है। यह दो भागों में है — पूर्व तापनी और उत्तर तापनी।

यह उपनिषद अथर्ववेद से जुड़ा है। इसमें नृसिंह-मंत्र तथा उनके उग्र और सौम्य दोनों रूपों का वर्णन है, और नृसिंह को जगत का कारण बताया गया है।

इसका मुख्य सिद्धांत है कि नृसिंह ही ब्रह्म हैं और उनका ध्यान तथा मंत्र-जप भय और पाप को नष्ट करते हैं। प्रसिद्ध मंत्र है — उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।

प्रसिद्ध कथन

उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम् । नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥

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स्रोत: अथर्ववेद