नर्मदा परिक्रमा
तीर्थ यात्राएँ
अन्य नाम: नर्मदा परिक्रमा, नर्मदा प्रदक्षिणा
नर्मदा परिक्रमा नर्मदा नदी की सम्पूर्ण परिक्रमा है, जो अमरकंटक से आरम्भ होकर दोनों तटों से होते हुए पुनः अमरकंटक लौटती है। यह संसार की एकमात्र नदी मानी जाती है जिसकी परिक्रमा की जाती है।
यह यात्रा लगभग दो हजार छह सौ किलोमीटर लम्बी है और प्रायः ढाई से तीन वर्ष में पूरी होती है। परिक्रमा नंगे पैर, नदी को दाईं ओर रखते हुए की जाती है और यात्री नदी पार नहीं करते। प्रमुख पड़ाव अमरकंटक, ओंकारेश्वर, महेश्वर और नर्मदा के तट के अनेक तीर्थ हैं।
नर्मदा को शिव की पुत्री माना जाता है और 'नर्मदे हर हर' के उच्चार से उसकी स्तुति होती है। मान्यता है कि नर्मदा का प्रत्येक कंकर शिवलिंग के समान है। इसका आधार ग्रंथ रेवाखण्ड (नर्मदा महात्म्य) माना जाता है, जो स्कन्द और वायु पुराण से जुड़ा है।
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: रेवाखण्ड / स्कन्द पुराण