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गोवर्धन परिक्रमा

तीर्थ यात्राएँ

अन्य नाम: गोवर्धन परिक्रमा, गिरिराज परिक्रमा, गिरिराज जी की परिक्रमा

कृष्णब्रजगोवर्धनपरिक्रमा

गोवर्धन परिक्रमा ब्रज क्षेत्र में गोवर्धन (गिरिराज) पर्वत की परिक्रमा है। इस मार्ग में दानघाटी मंदिर, जतीपुरा, पूंछरी का लौठा, कुसुम सरोवर, राधाकुंड, मानसी गंगा और गोविंद कुंड आदि प्रमुख स्थल पड़ते हैं।

यह परिक्रमा लगभग सात कोस अर्थात् इक्कीस किलोमीटर की है और प्रायः पाँच से सात घंटे में पूरी होती है। इसे नंगे पैर, पर्वत को दाईं ओर रखते हुए किया जाता है; दानघाटी से आरम्भ और वहीं समापन होता है। दंडवत परिक्रमा में अधिक समय लगता है।

पौराणिक कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने इंद्र के कोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए इस पर्वत को सात दिन-रात अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाए रखा था। गर्ग संहिता में गोवर्धन को 'गिरिराज' की उपाधि मिलने का वर्णन है।

प्रसिद्ध कथन

गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक, विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव।

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स्रोत: गर्ग संहिता / परंपरा-प्रसिद्ध