कठ उपनिषद
ग्रंथ
अन्य नाम: कठोपनिषद्, काठक उपनिषद
रचयिता / कर्ता: अपौरुषेय
कठ उपनिषद कृष्ण यजुर्वेद की कठ शाखा से संबंधित है। यह नचिकेता और मृत्यु के देवता यम के बीच हुए संवाद के रूप में प्रसिद्ध है।
इसमें दो अध्याय हैं। कथा के अनुसार बालक नचिकेता यमलोक जाकर मृत्यु का रहस्य और आत्मा की अमरता पूछता है, और यम उसे ब्रह्मविद्या का उपदेश देते हैं।
यम श्रेय (कल्याणकारी) और प्रेय (प्रिय) का भेद बताते हैं, आत्मा को अज और अमर कहते हैं, तथा 'रथ' और 'ॐ' के माध्यम से ब्रह्म की व्याख्या करते हैं।
यह श्रुति का भाग होने से अपौरुषेय है। आत्मा की अमरता और मोक्ष का यह अत्यंत प्रिय उपनिषद वेदांत का आधार-ग्रंथ है।
प्रसिद्ध कथन
उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत (कठ उपनिषद 1.3.14) — भाव: 'उठो, जागो, और श्रेष्ठ पुरुषों से ज्ञान प्राप्त करो।'
संबंधित
स्रोत: कठ उपनिषद (कृष्ण यजुर्वेद, कठ शाखा)