मार्कण्डेय पुराण
ग्रंथ
अन्य नाम: मार्कण्डेयपुराण
रचयिता / कर्ता: वेदव्यास
मार्कण्डेय पुराण अट्ठारह महापुराणों में एक प्रमुख ग्रंथ है, जिसके रचयिता वेदव्यास माने जाते हैं। इसका नाम मार्कण्डेय ऋषि के नाम पर है।
इसका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अंश 'देवी माहात्म्य' अथवा 'दुर्गा सप्तशती' है, जो इसमें अध्याय 81 से 93 के बीच स्थित है। इसमें दुर्गा द्वारा महिषासुर, मधु-कैटभ तथा शुम्भ-निशुम्भ आदि असुरों के वध की कथा है।
अन्य विषयों में सृष्टि-वर्णन, मन्वंतर, सूर्य-वंश तथा चंद्र-वंश की कथाएँ, हरिश्चंद्र आदि की कथाएँ और धर्म-शिक्षा हैं।
महात्मा: दुर्गा-उपासना और शक्ति-भक्ति में इस पुराण का विशेष स्थान है; नवरात्रि में इसका पाठ प्रमुख है।
प्रसिद्ध कथन
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥ (देवी माहात्म्य)
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स्रोत: मार्कण्डेय पुराण