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मकरध्वज

रामायण एवं रामचरितमानस

अन्य नाम: मगरध्वज, मकरध्वाज

रामायणहनुमान-पुत्रपाताललोक परंपरा

मकरध्वज को हनुमान का पुत्र माना जाता है। कथा के अनुसार लंका-दहन के बाद जब हनुमान समुद्र में स्नान करने के लिए उतरे, तब उनके शरीर की गर्मी से पसीने की एक बूँद जल में गिरी। उसे एक मकर (मगर/जल-जंतु) ने निगल लिया, जिससे मकरध्वज का जन्म हुआ।

पाताल के राजा अहिरावण (रावण का संबंधी) ने उसका पालन-पोषण किया और उसकी शक्ति देखकर उसे पाताल का द्वारपाल बनाया।

जब अहिरावण ने माया से राम-लक्ष्मण को पाताल ले जाकर छिपा दिया, तब हनुमान उन्हें ढूँढने पाताल पहुँचे। द्वार पर मकरध्वज ने उन्हें रोका; स्वामीभक्ति के कारण वह हनुमान से युद्ध करता रहा। हनुमान ने उसे पराजित कर पूँछ में बाँध लिया, अहिरावण का वध किया और राम के आदेश से मकरध्वज को पाताल का राजा बनाया।

यह कथा वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास के रामचरितमानस में नहीं मिलती; यह मुख्यतः क्षेत्रीय रामायणों (जैसे कृतिवासी रामायण) और लोक-परंपरा में प्रचलित है।

नाते-रिश्ते

  • पिता: हनुमान
  • पालक पिता: अहिरावण

प्रसिद्ध कथन

मकरध्वज ने हनुमान से कहा — "मैं तुम्हारा ही पुत्र मकरध्वज हूँ; समुद्र में गिरी तुम्हारे पसीने की बूँद से मेरा जन्म हुआ। पर अहिरावण मेरा स्वामी है, इसलिए तुम्हें भीतर जाने नहीं दूँगा।" (भावानुवाद)

संबंधित

हनुमानश्रीरामलक्ष्मणपाताल

स्रोत: क्षेत्रीय रामायण एवं लोक परंपरा (अहिरावण-प्रसंग)