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कालनेमि

रामायण एवं रामचरितमानस

रामायणराक्षसमायावीलंकाकाण्ड

कालनेमि रावण का मामा (मातुल) और एक मायावी राक्षस था। कुछ पाठों में उसे मारीच का पुत्र भी कहा गया है।

लंका युद्ध में जब मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण मूर्छित हुए और हनुमान संजीवनी लाने हिमालय की ओर चले, तब रावण ने कालनेमि को हनुमान का मार्ग रोकने भेजा। कालनेमि ने माया से सुंदर आश्रम बनाया और सन्यासी का रूप धारण किया।

उसने हनुमान को सरोवर में स्नान के लिए भेजा, जहाँ एक मगर ने उनका पैर पकड़ लिया। हनुमान ने मगर को मार डाला; वह मगर वस्तुतः दक्ष ऋषि के शाप से मगर बनी एक अप्सरा थी। उसने हनुमान को कालनेमि का भेद बताया, और हनुमान ने कालनेमि का वध कर दिया। यह प्रसंग मुख्यतः रामचरितमानस तथा अध्यात्म रामायण आदि में मिलता है।

नाते-रिश्ते

  • भानजा: रावण
  • पुत्र (कुछ पाठ): मारीच

प्रसिद्ध कथन

कालनेमि ने रावण से कहा — "जो वानर अकेला तुम्हारी लंका में घुसा, अशोक वाटिका उजाड़ी और लंका जला आया, उससे तुम बैर कर रहे हो? राम को सीता लौटा दो।" (भावानुवाद)

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स्रोत: रामचरितमानस – लंकाकाण्ड / अध्यात्म रामायण – युद्धकाण्ड