महर्लोक
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: महर्-लोक, महः-लोक
महर्लोक सप्तलोक का चौथा लोक है। यह स्वर्लोक के ऊपर और जनलोक के नीचे स्थित है तथा अत्यंत पवित्र माना गया है।
पुराणों के अनुसार महर्लोक में पुण्यात्मा और तपस्वी जीव निवास करते हैं। यहाँ कल्प के अंत तक रहने की सामर्थ्य होती है, पर मृत्यु का पूर्ण अभाव नहीं। महर्लोक की तपो-भूमि अत्यंत उज्ज्वल बताई गई है।
महर्लोक सप्तलोक-क्रम में मध्यवर्ती पुण्य-लोक है। इसका संबंध स्वर्लोक, जनलोक और सप्तलोक से है।
प्रसिद्ध कथन
भूर्लोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक — ये सात लोक कहे गए हैं। (भावानुवाद – विष्णु पुराण)
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स्रोत: विष्णु पुराण