तपोलोक
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: तपः-लोक
तपोलोक सप्तलोक का छठा लोक है। यह जनलोक के ऊपर और सत्यलोक के नीचे स्थित है और तपस्या का श्रेष्ठ स्थान माना गया है।
पुराणों के अनुसार तपोलोक में वैराग्य-युक्त, अत्यंत तेजस्वी और तपस्वी आत्माएँ निवास करती हैं, जो कल्प-क्षय तक अविनाशी रहती हैं। यहाँ केवल तप और ज्ञान का प्रकाश है।
तपोलोक सप्तलोक-क्रम में सत्यलोक के ठीक नीचे का श्रेष्ठ पुण्य-लोक है। इसका संबंध सप्तलोक, सत्यलोक और ब्रह्मलोक से है।
प्रसिद्ध कथन
तपोलोक में वैराग्य-युक्त तपस्वी आत्माएँ कल्प के अंत तक निवास करती हैं। (भावानुवाद – विष्णु पुराण)
संबंधित
स्रोत: विष्णु पुराण