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लोपामुद्रा

स्त्री-रत्न एवं विदुषियाँ

अन्य नाम: लोपामुद्रा, कावेरी, वरप्रदा

ब्रह्मवादिनीऋषिकाऋग्वेद

लोपामुद्रा वैदिक काल की प्रसिद्ध ऋषिका और ब्रह्मवादिनी थीं, जो ऋग्वेद के मंत्रों की द्रष्टा मानी जाती हैं।

महाभारत (वन पर्व) के अनुसार अगस्त्य ने अनेक प्राणियों के श्रेष्ठ अंगों से उन्हें रचा और विदर्भ नरेश को पुत्री रूप में सौंपा; बड़ी होकर वे अगस्त्य की पत्नी बनीं।

ऋग्वेद (1.179) में अगस्त्य और लोपामुद्रा का संवाद है, जिसमें लोपामुद्रा अपने पति को गृहस्थ-धर्म तथा संतान की ओर प्रेरित करती हैं। वे गृहस्थ आश्रम में रहते हुए भी तप और ज्ञान में अगस्त्य के समान मानी गईं; उनके पुत्र दृढ़स्यु हुए।

नाते-रिश्ते

  • पति: अगस्त्य
  • पुत्र: दृढ़स्यु
  • पालक पिता: विदर्भ नरेश

प्रसिद्ध कथन

बहुत वर्षों से मैंने दिन-रात तुम्हारी सेवा की; अब पति अपनी पत्नी के पास आएँ। (ऋग्वेद 1.179 – भावानुवाद)

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स्रोत: ऋग्वेद