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गार्गी

स्त्री-रत्न एवं विदुषियाँ

अन्य नाम: गार्गी वाचक्नवी, वाचक्नवी

ब्रह्मवादिनीदार्शनिकऋषिकाउपनिषद

गार्गी वाचक्नवी प्राचीन भारत की महान दार्शनिक और ब्रह्मवादिनी थीं। वे ऋग्वेद-कालीन ऋषिका परंपरा की थीं और ब्रह्मविद्या में निपुण मानी जाती हैं।

उनके पिता वाचक्नु (गर्ग वंशीय) थे, इसीलिए उन्हें गार्गी वाचक्नवी कहा जाता है। परंपरा में वे आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करती हुई ज्ञान-चर्चा में भाग लेती रहीं।

विदेह नरेश जनक के ब्रह्मयज्ञ (शास्त्रार्थ) में गार्गी ने याज्ञवल्क्य से "यह समस्त जगत् किस पर ओत-प्रोत है" जैसे क्रमिक प्रश्न किए और अंत में अविनाशी (अक्षर) ब्रह्म की चर्चा कराई। बृहदारण्यक उपनिषद के तीसरे अध्याय में उनका यह संवाद प्रमुख है; वे उस युग की उन गिनी-चुनी स्त्रियों में हैं जिन्होंने श्रुति-ग्रंथों में दार्शनिक संवाद किया।

नाते-रिश्ते

  • पिता: वाचक्नु
  • वंश: गर्ग

प्रसिद्ध कथन

यह समस्त जगत् जल पर ओत-प्रोत है; तब जल किस पर ओत-प्रोत है? (बृहदारण्यक उपनिषद 3.6 – भावानुवाद)
आप इसे महान् मानें कि आप उनके सामने झुककर उठें; ब्रह्म के विषय में कोई उन्हें नहीं जीत सकता। (भावानुवाद)

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स्रोत: बृहदारण्यक उपनिषद